💥ओबीसी समाज को आवश्यकता एक स्वाभिमानी नेतृत्व एवंम बलशाली संघटन की...!

 


💥देश में असंघटीत ओबीसी समाज का भविष्य अंधेरे में ? 💥

- मन की बात - लेखक : चौधरी दिनेश (रणजीत)


भारत देश में ओबीसी समाज की संख्या भारी मात्रा में होने के बावजूद ओबीसी समाज को सक्षम एवंम स्वाभिमानी नेतृत्व के अभाव में अनगीनत समस्याओं का सामना करणा पडता हैं बीपी मंडल की अध्यक्षता में बने मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षा संस्थानों के दाखिलों में में पिछड़े वर्गों को २७ परसेंट रिज़र्वेशन मिलने का रास्ता साफ हो पाया. ७ अगस्त १९९० को संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिह द्वारा मंडल की सिफारिशें लागू करने की घोषणा की गई थी यदी महामानव विश्वरत्न डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान इस देश में ना होता और तत्कालीन प्रधानमंत्री व्हि.पी.सिंह द्वारा मंडल आयोग की सिफारीशे संसद में लागू ना की गई होती तो इस देश में ओबीसी समाज की क्या अवस्था होती ? इस देश का इतिहास रहा हैं यहा असंघटीत समाज को प्रस्थापित एवंम जातीवादीयों द्वारा बार बार दबाने की साजीशें रची गई हैं...जातीयवादी शक्तीयों के खिलाफ यदी संघर्ष करणा है और स्वाभिमान सें जिवन जिना हैं तो असंघटीत एवंम घट गिनतीवाले समाज को भारतरत्न डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरजी की विचारधारा एवंम संविधान को अपनाना ही होगा राष्ट्रीयस्तरपर ओबीसी समाज का एक मजबूत एवंम बलशाली संघटन जब तक इस देश में स्थापीत नही होता तब तक इस देश में ओबीसी समाज का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा.

देम में सन १९७९-८ में स्थापित मंडल आयोग की प्रारंभिक सूची में पिछड़ी जातियों और समुदायों की संख्या ३ हजार ७४३ थी पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय आयोग के अनुसार सन २००६ में ओबीसी की पिछड़ी जातियों की संख्या अब ५ हजार ०१३ (अधिकांश संघ राज्य क्षेत्रों के आंकड़ों के बिना) बढ़ी हैं देश में भारी मात्रा में होणे के बावजूद ओबीसी समाज संक्षम एवंम स्वाभिमानी नेतृत्व के अभाव में राह भटक चुका यदी सही मायनो में सोचा जाय तो इस देश में ओबीसी का ‘संवैधानिक जन्मदाता’ और ‘संवैधानिक रखवाला’ कोई और नहीं बल्की भारतरत्न महामानव  डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ही हैं सन १९२८ मे मुंबई प्रान्त के गव्हर्नर ने ‘स्टार्ट’ नाम के एक अधिकारी की अध्यक्षता में पिछड़ी जातियों के लिए एक कमिटी नियुक्त की थी इस कमिटी में डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरजी ने ही शूद्र वर्ण से जुडी जातियों के लिए अन्य पिछड़ा कास्ट शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किया था इसी शब्द का शार्टफॉर्म ओबीसी हैं असंघटीत एवंम आपणे अती संयमशिलता के कारण इस समाज को सदियों तक राजनैतिक क्षेत्र में उच्चाई तक पहोचणे नही दिया गया मगर सन १९९० में जब देश मंडल आयोग की सिफारीशे लागू की गयी उस वक्त मजबूरण प्रस्थापितो एवंम जातीयवादीयों के हाथों की कठपुतलीया बनी देश की राजनैतिक पार्टीयों को ओबीसी समाज को राष्ट्रीय राजनिती में उच्चे पदों पर लाने के लिए मजबूर होणा पडा यदी देश में मंडल आयोग की सिफारीशे लागू नही होती तो ओबीसी समाज का क्या होता ? इस देश में यदी भारतरत्न डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर की विचारधारा एवंम उन के द्वारा लिखीत संविधान को अपणानेवाला एससी/एसटी/ओबीसी समाज का मजबूत एवंम बलशाली संघटन होता हैं तो इस देश को बलशाली बनने सें कौन रोख पायेगा....

'ऑर्गनायझेशन ऑफ बहुजन कम्युनिटी' (ओबीसी)

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